विश्व प्रसिद्ध जिम कार्बेट नेशनल पार्क के नाम को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। इस संबंध में एनटीसीए के सहायक वन महानिरीक्षक हेमंत सिंह ने उत्तराखंड के मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक की राय मांगी है।
विश्व प्रसिद्ध जिम कार्बेट नेशनल पार्क के नाम को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। पूर्व में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री अश्विनी चौबे के बाद अब 1980 में अविभाजित उत्तर प्रदेश के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन रहे आरएस भदौरिया ने केंद्रीय राज्य मंत्री को पत्र लिखकर कार्बेट का नाम रामगंगा रखे जाने की वकालत की है।
इस संबंध में एनटीसीए के सहायक वन महानिरीक्षक हेमंत सिंह ने उत्तराखंड के मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक की राय मांगी है। कार्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) के निदेशक राहुल ने बताया कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की ओर से पूर्व आइएफएस का पत्र मिला है। लेकिन अभी इस संबंध में कोई कार्रवाई विभागीय स्तर से शुरू नहीं की गई है। इसकी रिपोर्ट तैयार कर एनटीसीए को भेजी जाएगी।
केंद्रीय राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे अक्टूबर 2021 में कार्बेट पार्क के भ्रमण पर आए थे। तब उन्होंने इसका नाम बदलकर पुराना नामरामगंगा नेशनल पार्क रखे जाने की बात कही थी। हालांकि उत्तराखंड के वन मंत्री हरक सिंह रावत ने नाम नहीं बदलने की बात कही थी। लेकिन अब 1980 के दशक में अविभाजित उत्तर प्रदेश के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन रहे आरएस भदौरिया ने राज्य मंत्री अश्विनी चौबे को पत्र लिखकर कार्बेट का नाम वापस रामगंगा रखे जाने की वकालत की है।
नाम बदलकर हम गलती सुधारेंगे
पूर्व आइएफएस अधिकारी की ओर से केंद्रीय राज्य मंत्री को संबोधित पत्र में कहा गया है कि कार्बेट का नाम रामगंगा करने के सुझाव का मैं समर्थन करता हूं। पार्क क्षेत्र राम गंगा नदी का जलग्रहण क्षेत्र है, जो इसके बीच से होकर बहती है। वास्तव में यह पार्क की संपूर्ण वनस्पतियों व जीवों की जीवन रेखा है। आपके द्वारा सुझाया गया नाम नया नहीं है, यह अपने पिछले नाम का पुनरुद्धार है। यह पिछली गलती के सुधार के बराबर होगा। वर्ष 1936 में स्थापना के समय कार्बेट का नाम हेली नेशनल पार्क रखा गया। 1954-55 में इसका नाम बदलकर रामगंगा नेशनल पार्क किया गया। एक साल बाद ही इसका नाम कार्बेट पार्क कर दिया गया।
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