उत्तराखंड में एक बार फिर बढ़ने लगा कोरोना का संकट, पढ़ें- स्वास्थ्य विभाग की एडवायजरी, राजधानी फिर बनी हॉट स्पॉट

प्रदेश में कोरोना संक्रमण एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगा है। प्रदेश में तेजी से बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के लिए एडवायजरी जारी की है।


उत्तराखंड : प्रदेश में कोरोना संक्रमण एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगा है। प्रदेश में तेजी से बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के लिए एडवायजरी जारी की है। प्रभारी सचिव स्वास्थ्य डॉ राजेश कुमार ने जिला अधिकारियों को दिए कोरोना को लेकर दिशा निर्देश दिए हैं।

बता दें, प्रदेश में बीते 24 घंटे के भीतर प्रदेश में 142 नए संक्रमित मिले हैं। जबकि 38 मरीज ठीक हुए हैं। सक्रिय मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। प्रदेश में फिलहाल 1140 कोरोना मरीजों का इलाज चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक रविवार को 914 सैंपलों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है।वहीं, देहरादून जिले में सबसे ज्यादा 94, हरिद्वार में छह, नैनीताल में 15, अल्मोड़ा और पौड़ी में दो-दो, चमोली व चंपावत में एक-एक, टिहरी में सात, ऊधमसिंह नगर में तीन व उत्तरकाशी में 11 संक्रमित मरीज मिले हैं। प्रदेश की रिकवरी दर 94.96 प्रतिशत और संक्रमण दर 3.45 प्रतिशत दर्ज की गई।

देहरादून: राजधानी फिर बनी हॉट स्पॉट  

देहरादून फिर कोरोना संक्रमण का हॉट स्पॉट बन रहा है। पिछले एक महीने से राजधानी में संक्रमितों की संख्या में इजाफे का ट्रेंड देखने को मिल रहा है। राजधानी में पिछले कई दिनों से हर दिन सौ से अधिक मरीज मिल रहे हैं और जिले में एक्टिव मरीजों का आंकड़ा 700 के करीब पहुंच गया है। देहरादून में जांच बहुत कम हो रही है और एक सप्ताह में जांच का औसम 600 सैम्पल बना हुआ है। राजधानी में जांच की सुविधा है लेकिन टेस्टिंग बहुत कम हो रही। जिले में सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क के मानकों का पालन नहीं हो रहा है। 

जारी की गई एडवाइजरी

  • सामाजिक दूरी का पालन करना और मास्क पहनना जरूरी।
  • कोरोना के लक्षण वाले रोगियों को होम आइसोलेशन में रखा जाए।
  •  कोविड-19 टीकाकरण कवरेज को बढ़ाया जाए।
  • सभी जिलों को संक्रमित मरीजों के सैंपल जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजने के निर्देश।
  •  जिलाधिकारियों को आरटी-पीसीआर टेस्ट बढ़ाने के लिए कहा गया।
  •  बुखार फैल रहा तो तुरंत कोरोना जांच कराए
  • फ्लू और सांस की शिकायत वालों के टेस्ट किए जाने की सलाह भी दी गई है।
  • आईसीयू बेड की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
  • आक्सीजन प्लांट की क्रियाशीलता सुनिष्चित की जाए।

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