सतपाल महाराज ने बताया है,चारधाम यात्रा के लिए भी कुंभ की तरह कोरोना जांच की सीबीएनएएटी, आरटीपीसीआर की निगेटिव रिपोर्ट अथवा वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट अनिवार्य करने पर विचार चल रहा है।
उत्तराखंड : देश-प्रदेश में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच अब कुंभ के बाद अगले माह से शुरू होने वाली उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के सुरक्षित संचालन की चुनौती है। इसे देखते हुए सरकार मंथन में जुट गई है।
प्राप्त जानकारी मुताबिक़, प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति, धर्मस्व एवं सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि चारधाम यात्रा को लेकर सरकार पूरी तरह से तैयार है। सतपाल महाराज ने बताया है, चारधाम यात्रा के लिए भी कुंभ की तरह कोरोना जांच की सीबीएनएएटी, आरटीपीसीआर की निगेटिव रिपोर्ट अथवा वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट अनिवार्य करने पर विचार चल रहा है। मंडलायुक्त गढ़वाल एवं उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड के सीईओ रविनाथ रमन के अनुसार सभी पहलुओं पर मंथन के बाद जल्द ही चारधाम यात्रा के लिए मानक संचालन कार्यविधि (एसओपी) जारी की जाएगी।
साथ ही जो भी व्यक्ति अन्य प्रांतों से उत्तराखंड आएंगे उनको यह टेस्ट करवाने जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा पर आने वाले यात्रियों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन होगा और सभी प्रकार की जांच के बाद यात्रा की अनुमति दी जाएगी।
सतपाल महाराज ने कहा कि कि जो साधु संत कुंभ की पूरी परंपरा का निर्वहन करना चाहते हैं उनका हम हृदय से स्वागत करते हैं। लेकिन साथ ही मैं यह भी कहना चाहता हूं कि 27 और 30 अप्रैल के कुम्भ स्नान में सभी कोविड नियमों का पालन करते हुए देह दूरी, मास्क और सैनिटाइजर का प्रयोग अवश्य करें। संस्कृति मंत्री श्री महाराज ने बताया कि हरिद्वार में महाकुंभ पर आयोजित होने वाले देव डोलियों का कुंभ स्नान निर्धारित समय पर कोविड नियमों का पालन करते हुए आयोजित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस संदर्भ में प्रदेश के मुख्यमंत्री से उनकी वार्ता हो चुकी है। इस आयोजन में भी सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क और सैनिटाइजर की अनिवार्यता रहेगी। पर्यटन मंत्री ने कहा कि रावलों से बातचीत के बाद चारधाम यात्रा की पूरी समीक्षा कर ली गई है।
आगे भी मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के नेतृत्व में हम इसकी समीक्षा समय-समय पर करते रहेंगे, ताकि विधिवत रूप से समय पर मंदिरों के कपाट खोले जा सकें और हमारी जो मर्यादा और परंपरा है उसी के अनुरूप श्रद्धालु दर्शनों का लाभ भी उठा सकें। श्री महाराज ने कहा कि चारधाम यात्रा के दृष्टिगत निर्धारित क्षमता के अनुरूप ही यात्रियों को उत्तराखंड आने की इजाजत दी जाएगी।
चारधाम बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री के साथ ही हेमकुंड साहिब की यात्रा पर हर साल ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचते हैं। चारधाम यात्रा चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी जिलों की आर्थिकी से भी जुड़ी हुई है। पिछले साल कोरोना संकट के यात्रा नाममात्र को ही चली थी।
हालांकि, बाद में स्थिति कुछ सुधरी थी तो उम्मीद जताई जा रही थी कि इस मर्तबा चारधाम यात्रा पूरे उत्साह के साथ चलेगी, मगर अब कोरोना की दूसरी लहर ने चिंता बढ़ा दी है। वजह ये कि कोरोना संक्रमण के लिहाज से पर्वतीय जिलों में स्थिति फिलवक्त नियंत्रण में है।
उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड के सीईओ रविनाथ रमन भी मानते हैं कि मौजूदा परिस्थितियों में चारधाम यात्रा भी चुनौतीपूर्ण हो गई है। इसे देखते हुए सभी पहलुओं पर गंभीरता से मंथन चल रहा है। चारधाम यात्रा के लिए पंजीकरण तो अनिवार्य किया ही जाएगा।
दूसरे प्रदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आने से 72 घंटे पहले की आरटीपीसीआर की निगेटिव रिपोर्ट या फिर वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट अनिवार्य किया जाएगा। वैक्सीन की दूसरी डोज लगने के 14 दिन बाद यात्रा की इजाजत दी जा सकती है। इन सभी पहलुओं को लेकर अभी गहनता से विमर्श चल रहा है।

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