उत्तराखंड : मद्महेश्वर व तुंगनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि तय, इस दिन खुलेंगे कपाट

द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर धाम के कपाट 24 मई एवं तृतीय केदार तुंगनाथ धाम के कपाट 17 मई को विधि-विधान के साथ खोले जाएंगे। 17 मई को ही केदारनाथ के कपाट भी खुल रहे हैं।



उत्तराखंड :
द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर धाम के कपाट 24 मई एवं तृतीय केदार तुंगनाथ धाम के कपाट 17 मई को विधि-विधान के साथ खोले जाएंगे। 

बैसाखी के पावन पर्व पर सुबह 8 बजे से पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में पंचांग गणना के आधार पर द्वितीय केदार के कपाट खोलने की तिथि तय की गई।

जबकि मार्कण्डेय मंदिर मक्कूमठ में तृतीय केदार के कपाट खोलने की तिथि पंचांग गणना से तय की गई। 17 मई को ही केदारनाथ के कपाट भी खुल रहे हैं।

मंदिर के आचार्यगणों व वेदपाठियों द्वारा पंचांग गणना के आधार पर द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर धाम के कपाट खोलने की तिथि व समय तय कर घोषित किया गया।

उधर, शीतकालीन गद्दीस्थल मार्कण्डेय मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट खोलने की तिथि तय की गई। उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड के कार्याधिकारी एनपी जमलोकी ने बताया कि ओंकारेश्वर मंदिर में होने वाले धार्मिक अनुष्ठान की तैयारियां पूरी हो गई थी।

तुंगनाथ धाम 

तुंगनाथ उत्तराखण्ड में गढ़वाल के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित एक पर्वत है। इसी तुंगनाथ पर्वत पर तुंगनाथ मंदिर स्थित है , जो 3460 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है और पंच केदारों में सबसे ऊँचाई पर है। यह मंदिर १,००० साल पुराना माना जाता है और यहाँ भगवान शिव की पंच केदारों में से एक तुंगनाथ स्वरूप रूप की पूजा होती है। मान्यता है की इस मंदिर का निर्माण पाण्डवों द्वारा भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया गया था, जो कुरुक्षेत्र में हुए नरसंहार की वजह से पाण्डवों से रुष्ट थे। तुंगनाथ की चोटी तीन धाराओं का स्रोत है, जिनसे अक्षकामिनी नदी बनती है। मंदिर चोपता से ३ किलोमीटर दूर स्थित है। कहा जाता है कि पार्वती माता ने शिव जी को प्रसन्न करने के लिए यहां विवाह से पहले तपस्या की थी । इस तीर्थस्थल पर बुरांश के पेड़ बहुतायत में मिलते हैं।

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