सूर्य की लपटों से उपजा एक शक्तिशाली और बड़ा सौर तूफान 16 लाख किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है। इस सौर तूफान के रविवार या सोमवार को किसी भी समय धरती से टकराने की संभावना है। इसके सोमवार तक पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को प्रभावित करने की आशंका है।
सूर्य की लपटों से उपजा एक शक्तिशाली और बड़ा सौर तूफान 16 लाख किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है। इस सौर तूफान के रविवार या सोमवार को किसी भी समय धरती से टकराने की संभावना है। इसके सोमवार तक पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को प्रभावित करने की आशंका है। इन्हें जियोमैग्नेटिक तूफान भी कहा जाता है। वैज्ञानिकों सेटेलाइट सिग्नलों से लेकर विमानों की उड़ान तक को लेकर चेतावनी दी है। जुलाई के शुरुआती दिनों में सूरज की सतह से पैदा हुआ यह शक्तिशाली सौर तूफान 16 लाख 09 हजार 344 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है।
वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी
वैज्ञानिकों के अनुसार बीते चार वर्ष में यह सबसे बड़ा तूफान है। इस तूफान के चलते वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी की है। इसके तहत लोगों को जरूरी ना हो तो विमान यात्रा करने से बचने को कहा गया है, क्योंकि सेटेलाइट सिग्नलों में बाधा आ सकती है। विमानों की उड़ान, रेडियो सिग्नल, कम्युनिकेशन और मौसम पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।
रात में दिखेगी तेज रोशनी
इस सौर तूफान को लेकर स्पेसवेदर डॉट कॉम वेबसाइट ने भी जानकारी साझा की है। वेबसाइट के मुताबिक, सूरज के वायुमंडल से पैदा हुए इस सौर तूफान की वजह से धरती के चुंबकीय क्षेत्र के प्रभुत्व वाले अंतरिक्ष के एक क्षेत्र में काफी प्रभाव देखने को मिल सकता है। यही नहीं उत्तरी या दक्षिण अक्षांशों पर रहने वाले लोगों को रात में सुंदर अरोरा दिख सकता है। दरअसल ध्रुवों के पास आसमान में रात के समय तेज रोशनी दिखने को अरोरा कहा जाता है। नासा के मुताबिक सौर तूफान की रफ्तार 16 लाख किलोमीटर प्रति घंटे से भी ज्यादा हो सकती है। ऐसे में अगर अंतरिक्ष में महातूफान आता है तो धरती के लगभग हर शहर से बिजली गुल हो सकती है।
धरती पर यह पड़ेगा असर
धरती की ओर बढ़ रहे सौर तूफान के चलते वायुमंडल गर्म हो सकता है। ऐसे में इसका सीधा असर सेटेलाइट पर पड़ेगा। इसके अलावा जीपीएस नेवीगेशन, मोबाइल फोन सिग्नल और सैटेलाइट टीवी में रुकावट पैदा हो सकती है। यही नहीं पावर लाइंस में करंट भी तेज हो सकता है, जिससे ट्रांसफार्मर भी उड़ सकते हैं। हाला की जानकारों की माने तो ऐसा कम ही देखने को मिलता है, क्योंकि धरती का चुंबकीय क्षेत्र इस खतरे के खिलाफ कवच का काम करता है।

0 Comments