स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 में 10 हिमालय राज्यों की रैंकिंग में भले ही उत्तराखंड को प्रथम स्थान मिला हो, लेकिन पौड़ी जिले के कोटद्वार और दुगड्डा में जमीनी हकीकत इसके उलट है।
स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 में 10 हिमालय राज्यों की रैंकिंग में भले ही उत्तराखंड को प्रथम स्थान मिला हो, लेकिन पौड़ी जिले के कोटद्वार और दुगड्डा में जमीनी हकीकत इसके उलट है। कोटद्वार नगर निगम सहित आसपास के निकाय स्वच्छता सर्वेक्षण में कहीं नहीं टीके। एनजीटी के कई बार फटकार लगाने के बावजूद भी हालात जस के तस हैं।
कोटद्वार नगर निगम के 40 वार्डों में प्रतिदिन 40 टन कूड़ा एकत्र होता है, लेकिन इस कूड़े के निस्तारण के लिए कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं बन सकी है। नगर निगम के एकमात्र डंपिंग जोन झूलाबस्ती स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड में कूड़े के पहाड़ खड़े हो चुके हैं, जिसका निस्तारण करना नगर निगम के लिए चुनौती है। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी कई बार इसको लेकर आवाज उठा चुके हैं। कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था नहीं होने के कारण नगर निगम प्रशासन को एनजीटी से कई बार फटकार भी लग चुकी है, लेकिन तब भी हालात नहीं सुधरे हैं। यही हाल दुगड्डा नगरपालिका का भी है।
कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था नहीं होने पर एनजीटी कई बार नगर निगम प्रशासन को फटकार लगा चुका है। बीते 1 अप्रैल को ट्रेचिंग ग्राउंड के लिए नगर निगम को हल्दूखाता में 0.998 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरित करने के लिए केंद्र से सैद्धांतिक स्वीकृति मिली है। इसके साथ ही ट्रेंचिंग ग्राउंड को विकसित करने के लिए स्वच्छ भारत मिशन के तहत केंद्र सरकार ने 3.5 करोड़ की धनराशि भी आवंटित की। लेकिन करीब 8 माह बाद भी ट्रेचिंग ग्राउंड के लिए चयनित वन भूमि नगर निगम को हस्तांतरित नहीं हो पाई है।
नगर आयुक्त कोटद्वार केएस नेगी का कहना है कि टचिंग ग्राउंड के लिए वन भूमि के हस्तांतरण में अभी पांच माह का समय लगेगा। गाड़ीघाट में कूड़ा निस्तारण का कार्य तेजी से कराया जा रहा है। जल्द ही पुराने कूड़े का निस्तारण करा लिया जाएगा।
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