चमोली जिले के पोखरी में भालू का आतंक जारी है, अब स्कूल से लौट रहे बच्चों पर हमला हो रहा है। हरिशंकर गनियाला गांव में स्कूल से लौट रहे बच्चों पर भालू ने हमला किया, जिससे वे डरकर भागे और अपना बैग छोड़ दिया।
उत्तराखंड: भालू का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। भालू अब स्कूल जा रहे बच्चों पर भी हमलावर हो रहा है। हरिशंकर गनियाला गांव स्कूल से लौट रहे बच्चों पर भालू ने हमला किया तो भाग कर जान बचाई। हालांकि हल्ला मचाने के बाद ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर भालू को भगाया है।
जिले में अधिकतर विद्यालय गांवों से दूर हैं। तथा वन क्षेत्रों से रास्ता गुजरता है। ऐसे में भालू के आतंक से शिक्षा ग्रहण करने को लेकर नई समस्या पैदा हो गई है। वन विभाग ने भी भालू की सक्रियता वाले क्षेत्रों में छ: टीमें तैनात की है। जो रात्रि को गश्त के साथ आतिशबाजी व कनस्तर बजाकर ग्रामीणों को भालू से सजग कर रहे हैं।
बताया गया कि पोखरी विकासखंड के जूनियर हाइस्कूल हरिशंकर से पढ़ाई कर चार बजे लगभग स्कूली बच्चें अपने गांव गनियाला आ रहे थे। बताया गया कि स्कूल से गनियाला गांव की दूरी दो किमी है। रास्तें में खेतों में भालू छुपा था। बताया गया कि इस दौरान कक्षा छ:से आठ तक के चार छात्र छात्राएं एक साथ चल रही थी कि खेतों के पास छुपे भालू ने उन पर हमला कर दिया।
गनीमत यह रही कि सभी छात्र छात्राएं तेजी से नीचे ढ़लान में भागे । इस दौरान उन्होंने अपना स्कूल का बैग भी मौके पर छोड़ दिया । जिसे भालू ने फाड़ डाला। बताया गया कि शोर सुनकर ग्रामीण भी मौके पर पहुंचे इस दौरान लोगों ने हल्ला कर भालू को दूर भगाया है। गनियाला निवासी धन सिंह चौधरी ने बताया कि स्कूली बच्चों के हल्ले को सुनकर वे मौके पर पहुंचे तो भालू वहीं पर विचरण कर रहा था।
गांव के ही जमन सिंह बत्र्वाल का कहना है कि वहां से भालू को भगाने के बाद रात्रि को भालू फिर गांव के पास आया था। जिसे ग्रामीणों ने फिर से भगाया। तथा वन विभाग के कर्मचारियों ने भी मौके पर पहुंचकर भालू को भगाने में मदद की । जूनियर हाइस्कूल में कक्षा आठ की छात्रा दिपिका , दिब्या व कक्षा सात के छात्र आकाश व अंकित उन छात्र छात्राओं में शामिल हैं। जिन्हें भालू ने दौड़ाया था। कहना है कि अगर हम थोड़ भी देर करते तो भालू के हमले का शिकार बनते ।

0 Comments