उत्तराखंड : विश्वव्यापी कोरोना संक्रमण से चारधाम की यात्रा में लगा ब्रेक, यात्रा पर संकट के बादल.....

कोरोना महामारी के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए इस बार चारधाम यात्रा पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। पिछले साल कोरोना महामारी के कारण चारधाम यात्रा में कम संख्या में ही श्रद्धालु पहुंचे थे।


उत्तराखंड :
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर मैं पूरे देशभर में फिर से संकट का माहौल पैदा कर दिया है। पिछले वर्ष की तरह ही इस वर्ष भी मार्च के महीने से कोरोना महामारी में डर का माहौल पैदा कर दिया है। कोरोना महामारी के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए इस बार चारधाम यात्रा पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। पिछले साल कोरोना महामारी के कारण चारधाम यात्रा में कम संख्या में ही श्रद्धालु पहुंचे थे। 

चार धाम यात्रा से जुड़े परिवहन तथा अन्य व्यवसायियों को इस वर्ष चारधाम यात्रा से बड़ी उम्मीदें थी। लेकिन इस बार भी कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए उन्हें कोई राहत नहीं मिल पा रही है। बता दें कि चार धाम यात्रा से बड़ी संख्या में परिवहन, होटल और अन्य तरह के व्यवसाई जुड़े हैं। जिनकी आर्थिकी कहीं हद तक चार धाम यात्रा पर निर्भर करती है। पूरे वर्ष यह व्यवसाई चार धाम यात्रा से बड़ी उम्मीद लगाए रहते हैं। लेकिन इस बार भी विश्वव्यापी कोरोना महामारी के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए चारधाम यात्रा पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। 

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वर्ष 2013 में केदार घाटी में आई आपदा के बाद भी चारधाम यात्रा पूरी तरह से ठप हो गई थी। जिसके बाद अगले चार वर्षों तक यात्रा पटरी पर नहीं लौट पाई। बीच के वर्षों में चारधाम यात्रा चलने से स्थिति कुछ सामान्य हुई तो विगत वर्ष चारधाम यात्रा से ठीक पहले कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन लागू हो गया और चारधाम यात्रा पूरी तरह से ठप हो गई। 

इस वर्ष कोरोना संक्रमण की रफ्तार थमने के बाद चारधाम यात्रा को लेकर व्यवसायियों में यात्रा को लेकर कुछ उम्मीद जगी थी। मगर, तब तक कोरोना वायरस संक्रमण के दूसरे दौर ने स्थिति को और भी नाजुक बना दिया। पिछले कुछ दिनों से उत्तराखंड में भी कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। प्रदेश सरकार ने सभी तेरह जिलों में रविवार को कोविड कफ्र्यू जारी किया है। 

उधर, चारधाम यात्रा को लेकर पिछले माह तक जो तैयारियां की जा रही थी, वह भी फिलहाल ठप पड़ गई हैं। चारधाम यात्रा को लेकर परिवहन व्यवसायियों ने अपनी बसों को तैयार करना शुरू कर कर दिया था। मगर, कोविड की इस दूसरी वेव ने सभी तैयारियों को ठप करके रख दिया है। अगले माह 14 मई को यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा शुरू हो जाएगी। मगर, वर्तमान हालात को देखते हुए नहीं लग रहा कि यात्रा की स्थिति ज्यादा उत्साहजनक होगी। 

ऋषिकेश से चारधाम यात्रा का संचालन प्रमुख रूप से नौ परिवहन कंपनियों की संस्था संयुक्त रोटेशन यात्रा व्यवस्था समिति करती है। मगर, संयुक्त रोटेशन की माने तो अभी तक यात्रा को लेकर कोई सकारात्मक रुझान नहीं हैं। 

संयुक्त रोटेशन के प्रशासनिक अधिकारी बृजभानु प्रताप गिरी ने बताया कि यात्रा को लेकर तीन चार माह पहले से ही एडवांस बुकिंग शुरू हो जाती थी। इस वर्ष यात्रा को लेकर कुछ उम्मीद जगी थी। दो माह पहले तक संयुक्त रोटेशन में बुकिंग तो नहीं मगर, यात्रा को लेकर पूछताछ के लिए यात्री संपर्क करने लगे थे। मगर, कोरोना संक्रमण की की इस दूसरी वेव के बाद सब कुछ ठप हो गया है। 

परिवहन व्यवसायी व संयुक्त रोटेशन यात्रा व्यवस्था समिति के पूर्व अध्यक्ष सुधीर राय का कहना है कि कोरोना महामारी के कारण पिछले वर्ष चारधाम यात्रा पूरी तरह से ठप रही। इस वर्ष परिवहन व्यवसायियों को यात्रा से खासी उम्मीदें थी। लॉकडाउन खुलने के बाद हालात कुछ सामान्य भी होने लगे थे और सभी चारधाम यात्रा की तैयारियों में भी जुट गए थे। मगर, कोरोना संक्रमण की इस दूसरी लहर ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। परिवहन व्यवसायियों के समक्ष अब विकट स्थित आ गई है। बैंकों की किश्त चुकानी और अन्य खर्च चलाने मुश्किल हो रहे हैं।

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